Universe: Ek Rahasya – Part 4
आयान हड़बड़ाकर उठ बैठा।
कमरा अंधेरे में डूबा था, लेकिन उसके हाथ पर बना वो गोल निशान अब भी हल्की नीली रोशनी छोड़ रहा था।
“ये सपना नहीं था…”
उसकी आवाज़ खुद उसके कानों में अजनबी लगी।
तभी खिड़की के बाहर से हवा का तेज़ झोंका आया। परदे अपने आप लहराने लगे।
और फिर—
समय रुक गया।
घड़ी की सुइयाँ थम गईं। बाहर उड़ता पत्ता हवा में ही स्थिर हो गया।
आयान की सांसें तेज़ हो गईं।
“ऑरियन…?”
अंधेरे से वही ऊर्जा-आकृति उभरी।
🌠 “वो जाग चुका है, आयान।”
“कौन?” आयान ने पूछा, हालांकि जवाब वह पहले ही जानता था।
ऑरियन का स्वर भारी हो गया—
“नेक्रोस।”
अचानक दीवार पर ब्रह्मांड का दृश्य बन गया।
एक साया… जो ब्लैक होल से भी गहरा था। जहाँ वो गुजरता, तारे बुझ जाते, ग्रह टूट जाते।
🌌 “नेक्रोस यूनिवर्स को खत्म नहीं करना चाहता,”
“वो उसे फिर से लिखना चाहता है… अपने नियमों पर।”
आयान ने मुट्ठी भींच ली।
“और मैं इसमें कहाँ फिट होता हूँ?”
ऑरियन ने आयान के निशान की ओर देखा।
“तुम ‘सीकर’ हो—वो जो सच देख सकता है, और चुनाव कर सकता है।”
तभी निशान तेज़ी से चमक उठा।
कमरा टूटने लगा… जैसे शीशा।
आयान को लगा वह गिर रहा है—
लेकिन अगले ही पल वह एक और जगह था।
चारों ओर तैरते द्वार (Portals)।
हर द्वार के पीछे एक अलग वास्तविकता—
एक में पृथ्वी तबाह,
एक में इंसान कभी पैदा ही नहीं हुए,
और एक में… आयान खुद एक सिंहासन पर बैठा था।
“ये… मैं?” आयान कांप गया।
🌠 “ये संभावनाएँ हैं,” ऑरियन बोला।
“तुम्हारा एक फैसला तय करेगा कि कौन-सी सच्चाई बचेगी।”
तभी एक ठंडी हँसी गूंजी।
पूरे स्पेस में कंपन फैल गया।
🕳️ “तो तुम हो वो इंसान…”
एक साया पोर्टल से बाहर निकला।
आँखें नहीं थीं—बस अनंत अंधकार।
“मैं नेक्रोस हूँ।”
आयान का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
नेक्रोस ने आगे बढ़ते हुए कहा—
“अगर तुम मेरे साथ आओ, तो मैं इस ब्रह्मांड को दर्द से मुक्त कर दूँगा।”
ऑरियन चिल्लाया—
“उसकी बातों में मत आना!”
दो शक्तियाँ…
एक इंसान…
और एक फैसला, जो पूरे यूनिवर्स को बदल सकता था।
आयान ने आँखें बंद कीं—
और आगे बढ़ गया।





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